Saturday, 13 August 2016

नमन।

नमन॥
© चन्द्रहास ।

बादलों का जमावडा अंबर मे हैं
पर वक्त पर बारीश नही होती हैं।
घोषणाएं तो लोग बहोत करते हैं
पर वक्त पर मदद नही मीलती हैं॥

योजनाएं बहोत बनती हैं सरकारी
सही दाम में नही बिकती तरकारी।
योजनाएं बहोत बनती हैं सरकारी
पर फेरे चक्कर पडते कोर्ट कचेरी॥

अपना नही सभीका पेट भर जाएं
सोचकर किसान अनाज उगाता हैं।
खुद को नही तो देश बचानेके लिए
जवान गोली मारता खाता सहता हैं॥

कवि की पीडा कवि ही जानता हैं
सच कहता हूं हाथ में भगवद्गीता हैं।
नन्हे हाथों से चिताएं सुलगती हैं
तब अगन दिल में झुलसती हैं॥

जय जवान जय किसान नारा हैं
क्यों शहीदी इन के ही नसीब हैं। नमन करे चन्द्रहास इन्हे शत कोटी
इन्हीं के समर्पण से हम जिंदा हैं ॥

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