Sunday, 30 April 2017

जो है वो तेरा है, मैया तेरा है ।

जो है वो तेरा है, मैया तेरा है ।

चन्द्रहास: ।


जो है वो तेरा है,  मैया तेरा है ।
मै भी तेरा हूँ,  मैया तेरा हूँ ।। १ ।। 

आँचल में छुपाओ, चरणों में बिठाओ ।
शरण में स्वीकारो, मैया मुझे अपनाओ ।। २ ।।

मैया तेरी शरण में, तिहुँ लोक रहते है । 
ब्रह्मविष्णुमहेशजी, तुम्हे पूजते है ।। ३ ।।

अभागा तो वही है, जिसने पूजा नहीं है ।  
अंधा तो वही है, जो तुम्हे देखा नहीं है ।। ४ ।। 

अब नहीं जाता रुकते, थका हूँ राह देखते । 
दरबार में बुलाओ माते, तुमसे करनी है बाते ।। ५ ।।

क्षमा करो माई, शरण दो माई । 
पास लो माई, दर्शन दो माई ।। ६ ।।  

Sunday, 9 April 2017

मानस स्नान

मानस स्नान।
© चन्द्रहासः।

भावत्व का जल हों
सुमिरन का साबून हों।
मन को निचोड कर धोयें
मद मत्सर मल बह जायें॥

मन का कोना कोना
बन जावें आईना।
मन में हों करूणा,
परमेश की स्थापना॥

दुख का न हों कारण
हों ईष्टदेव का आलंबन।
आनन्द का हों संगुणन
नित हों सन्तों का वंदन॥

चैतन्यसे जुडे जडता छोडे
परमतत्त्व की साधना करें।
मनुष्य का देह भारते जन्म
मानस स्नान से सार्थक करें॥

प्रतिदिन करे जो ऐसा स्नान
गो लोक मे पावें वह स्थान।
धरती करें उसका गुणगान
हास मानें वह तीर्थों के समान॥

संध्या समा अशी ही .

संध्या समा अशी ही  . © चन्द्रहास शास्त्री षट्पाद बद्ध कोशी, संध्या समा अशी ही व्याधी नवी नवी ही, संध्या समा अशी ही .   केसांत माळलेली,...