Monday, 5 September 2016

बात छोटीसी है।



 ..... बात छोटीसी है। 

- डॉ. चन्द्रहास सोनपेठकर 

किसी राजा ने एक कवी से पूछा
आप को कुछ तकलीफ तो नहीं ?
कवी ने कहा, बात छोटीसी है
पर चुभती मुझे बहोत है जी। 

राजा ने कहा हाथ बढाकर
कह दो अपनी बात कविवर। 
कवी ने कहा राजन ऐसे नहीं
पहले अभय दो शपथ लेकर।

राजा ने  अभय दिया  कवि को
कवी ने बात बताई राजा को। 
राजन, लोग आइना देखे बिना
बात हरदम किया  करते है। 

राजा ने कहा सुनो कविवर
ऐसा केवल मेरे राज्य में नहीं। 
सभी राज्यो में होता है निरंतर
आप पहले बाकियोंको बोलिये । 

कवी ने कहा राजन क्षमस्व
सभी लोगोंका है यही मंतव्य। 
सुधरें पहले मुझे छोड़कर सभी
मेरा नंबर लिस्ट में आये न कभी। 

मैं ही शायद ऐसा अनाड़ी हूं
परिवर्तन की आस लिए हूं। 
सभी भविष्य में ही सुधरेंगे
मैं वर्तमान की आस लिए हूं। 

चलता हूं अभी मैं यहाँ से
और कही नहीं जाऊंगा मैं। 
अपनीही कुटिया में से
आईना बाहर करूँगा मैं। 







 

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