Thursday, 11 August 2016

शारदे जगदंबे वरदे सर्वदे।।

शारदे जगदंबे वरदे सर्वदे।।
© चन्द्रहासः।

         मां सरस्वती आप को निमित्त बना कर कोई कार्य संपन्न कराती है; तो गर्व नही। मां की कृपा को जान लों। मां जैसा दयालु, कृपालु कोई दुजा कहां? वैसे भी माई से दुजा कौन है!

निरन्तर पूजत रहूं मै देवी
मात भवानी तेरे चरणों को।
मन चातक सम नित धावे
मात भवानी तेरे चरणों को।।

शारदे जगदंबे वरदे सर्वदे
मै पामर तुम पुण्यकारिणी।
हर क्षण सावध रहूं मै माई
हंससमान हों सच्चरित मेरों।।

बासरवासिनी जय हंसवाहनी
मंगलकारिणी अमंगलनाशिनी।
वीणावादिनी जय हो तुम्हारों
कृपाकटाक्ष से हमें निहारों॥

पावन मूरत, वसन शुभ्र है
कर मे अक्षमाला विराजत है।
चरणयुगल मे विश्व समाहित
माते, तेरा सदा सदा जय हों॥

बहता नीर हों, रूक ना जावें
जीवन आगे आगे बढता जावें।
तेरी कृपा मन को सदा स्मरावें
तेरे चरणों मे चित का डेरा होंवे।।

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