Monday, 1 August 2016

पेड लगाओं।

पेड लगाओं।
- चन्द्रहासः।

उपर बरफ की चट्टाने
निचे लहरे सागर की।
बुंद बुंद को तरस रही
जनता बुंदेलखंड की।।

समंदर दूर तो नही
फिर भी प्यासी रही।
जनता देवगिरी और
विदर्भ तेलंगण की।।

कैसे मनाऊं मै छुटिया
देखते हुंये टूटती कुटिया।
पेड लगाओं पेड रखाओं
कसम है मां भारती की।।
© चन्द्रहास

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