Saturday, 20 May 2017

श्रीजगदम्बा को विनती!

श्रीजगदम्बा को विनती!

आशीष से दूर है, जगदम्बा के
डरना उसी का काम है।
माई करती है सब कुछ अच्छा
सच्चा उस का नाम है॥1॥

बात सीधीसी सहज है यह
पर समझता कौन है।
अपने आप में विलीन तथा
माई से दूर मौन है॥2॥

हम यन्त्र है माई यन्त्री है
उसी का तन्त्र है।
सभ कुछ माई करती है
नाम ही मन्त्र है॥3॥

स्मरण कर सदा हृदय से
नाम गाते रहों।
माई के चरणों के पास
सदा आते रहों॥4॥

माई से दूर भयंकर भय है
पास अभय है।
माई से दूर सब मृण्मय है
पास चिन्मय है॥5॥

इक पलभर भी आप का
मुझे वियोग ना हों।
माई, विनती है आप से
ऐसा संयोजन हों॥6॥

©चन्द्रहासः।

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