गोमातेसी भजे जो सदैव।
© चन्द्रहास
गोमातेसी भजे जो सदैव।
उद्धरते कुळगोत्र तयाचे।।१।।
लाभते आयुष्य निरोगी।
सर्व सुख जगी पावतसे।।२।।
पूजितां कामधेनुकन्या।
दिलीपां वांछीत लाभले।।३।।
विश्वंभर राखितो धेनु।
वाजवोनी वेणु वृंदावने।।४।।
भारते देशे जन्म हा दुर्लभ।
त्याहूनी दुर्लभ भक्ती असे।।५।।
जळती त्याची पापे ही क्षणात।
वंदन गोमातेसी जो करीतसे।।६।।
जय श्रीकृष्ण!!!
सर्व सुख जगी पावतसे।।२।।
पूजितां कामधेनुकन्या।
दिलीपां वांछीत लाभले।।३।।
विश्वंभर राखितो धेनु।
वाजवोनी वेणु वृंदावने।।४।।
भारते देशे जन्म हा दुर्लभ।
त्याहूनी दुर्लभ भक्ती असे।।५।।
जळती त्याची पापे ही क्षणात।
वंदन गोमातेसी जो करीतसे।।६।।
जय श्रीकृष्ण!!!
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