Friday, 22 July 2016

जिधर भी देखो तुम हो प्यारे।

जिधर भी देखो तुम हो प्यारे।

डॉ. चन्द्रहास शास्त्री 


कण कण में समाहित तुम हो प्यारे।

जिधर भी देखो तुम हो प्यारे।।

 

युगल तुम्हारी छवि मन को भाये।

जो भी देखे सुध अपनी खो जाये।।

 

हाथ में बंसी माथे पर पंखुड़ी होये। 

बिरहगां में तुम्हारे भक्त जन रोये।।

 

रोनेवाले सच में सयाने वो होये। 

न रोनेवाले तो फेरे में अटके जाये।।

 

मीरा सयानी सयानी राधारानी गाए। 

हम मूरख से बात क्या कहलाये।।

 

चन्द्रहास कर प्रणाम विनती कराये। 

मोहन, जाना है तो तुम ना ही आये।।

 

पर मुख से थारो नित नाम गवाएं। 

नाम तुम्हारो कभी ना भुलाये।। 

जय श्रीकृष्ण। 

 

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