Thursday, 9 February 2017

सत्य की ओर देखों।

सत्य की ओर देखों।
© चन्द्रहास शास्त्री

अंतीम विजय होता है सत्य का
न जाने तब तक कितना झूठ चलता है।

सत्य बारंबार त्रस्त संत्रस्त होता है
झूठ तो बुढापे मे ही दंडित होता है।

तो क्यों हम सच को पाल बैठे है
आज मान्यवर जवाब आपको देना है।

उस बालक ने सिधे मुझसे प्रश्न किया
मैने भी उसको सिधे सिधे जवाब दिया।

झूठ की ओर तुम देखते क्यों हों
सच को अनदेखा करते क्यों हों।

मनुष्य जिसकी ओर देखता है
वैसा ही निश्चित बन जाता है।

कल से सत्य की ओर देखा करों
झूठ को नजरअंदाज तुम किया करों।

झूठ रोता होगा रातभर
सच आराम से सोता है
झूठ की चांदी पलभर
सच अनमोल हीरा होता है।

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